Thursday, August 7, 2008

ग़ज़ल

ग़ज़ल
तेरी ख़ामोश निगाहों में अया होता हैमुझको मालूम है मुहब्बत का नशा होता हैमुझसे मिलता है वो जब भी मेरे हमदम की तरहउसकी पलकों पे कोई ख़्वाब सजा होता हैचैन कब पाया है मैंने ये न पूछो मुझसेमैं करूं शिकवा तो नाराज़ ख़ुदा होता हैहाथ भी रहते हैं साये में मेरे आंचल केजब हथेली पे तेरा नाम लिखा होता है-फ़िरदौस खान

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